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आर्यन्स का भारत में आगमन कब हुआ?

आर्यन्स का भारत आगमन 

Aryans attack on india elearnner

1500 BC और 600 BC के युग को पूर्व वैदिक युग (ऋग वैदिक काल ) तथा बाद में इसे वैदिक युग में विभाजित किया गया|
🔹पूर्व वैदिक युग 1500 BC से 1000 BC तक यह वह समय था जब आर्यनों ने भारत पर आक्रमण किया|
🔹बाद में वैदिक युग 1000 BC से 600 BC तक
 • आर्यन्स की पहचान 
🔹आर्यन्स चरवाहे थे यानि वो खेती वाणी नहीं करते थे|
🔹वे कई प्रकार के जानवर पालते थे जिनमे घोड़ा उनके लिए महत्वपूर्ण था| 🔹आर्यन्स ने अपनी यात्रा पश्चिमी एशिया से भारत की ओर 200 BC के उपरांत शुरू की|
🔹आर्यन्स का पहला पड़ाव भारत की यात्रा के दौरान ईरान था|

  • ऋग वेद 
🔹यह इंडो यूरोपियन भाषा की सवसे पुरानी पुस्तक है|
🔹इसमें प्रार्थना का सार संग्रह है इसे दस किताबों या मंडलों में विभाजित  किया गया है |
🔹इसमें प्रार्थनाओं का संकलन है जिसे बिभिन्न देवता जैसे अग्नि, वरुण,इन्द्र,  मित्रा आदि को समर्पित किया गया है|
🔹ऋग वेद ने अपने प्रसंग 'अवेस्ता' ईरानियों की सवसे पुरानी किताब जिसमें ईश्वर के कुछ बिभिन्न नाम तथा कुछ सामाजिक वर्गों में वांटे हैं|

  • वैदिक काल की नदियाँ
🔹पहले आर्यन्स पूर्वी अफगानिस्तान, पंजाब तथा उत्तरप्रदेश के कुछ भागों म   रहते थे|
🔹कुछ नदियाँ जैसे कुम्भ सरस्वती, सिन्धु का ऋग वेद में उल्लेख किया गया है|
🔹सप्त सिन्धु या सात मुख्य नदियों के समूह का भारत के ऋग वेद मे उल्लेख किया गया है|
🔹वे सात मुख्य नदियाँ यहाँ हैं

1. पूर्व में सरस्वती
2. पश्चिम में सिन्धु
3. सतुद्रु (सतलुज)
4. विपासा (व्यास)
5. असिक्नी (चेनाब)
6. परुषनी (रावी)
7. वितस्ता (झेलम)

• आदिवासी संघर्ष
🔹आर्यन के प्रथम दस्ते ने भारत में लगभग 1500 B.C में आक्रमण किया|
🔹उन्हें भारत के मूल निवासियों जैसे दास व दस्यु से संघर्ष करना पड़ा|
🔹हालांकि दास को आर्यन की तरफ से कभी भी आक्रमण के लिए उत्तेजित नहीं किया गया, पर दस्यु हत्या का ऋग वेद बराबर उल्लेख किया गया है|
🔹इन्द्र को ऋग वेद में पुरान्द्र के नाम से भी उल्लेख किया गया है जिसे किलों का भंजक भी कहा गया है|
🔹पूर्व आर्यन के किलों का उल्लेख हड़प्पा संस्कृति की vajahse भी किया गया है|
🔹आर्यन मूल निवासियों पर इसलिए भी विजय प्राप्त कर पाए क्योंकि उनके पास बेहतर हथियार, वरमान तथा घोड़े वाले रथ थे|
🔹आर्यन दो तरह के संघर्षों में व्यस्त रहे एक तो स्वदेशी लोग दूसरे अपने आप में|
🔹आर्यन को पांच आदिवासी जातियों में विभाजित किया गया जिसे पंचजन कहा गया तथा गैर आर्यन की भी मदद प्राप्त की|
🔹आर्यन गोत्र के शासक भरत व त्रित्सु थे वशिष्ठ पुरोहित मदद करते थे|
🔹भारतवर्ष का नाम राजा भरत के ऊपर रखा गया|

• दसराजन युद्ध
🔹भारत पर भरत गोत्र के राजा ने शासन किया तथा उसे दस राजाओं का विरोध भी झेलना पड़ा था, पांच आर्यन पांच गैर आर्यन|
🔹इनके वीच में हुए युद्ध को दस राजाओं का युद्ध या दसराजन युद्ध के नाम से जाना जाता है|
🔹परुषनी या रावी नदी पर किया गया युद्ध सूद के द्वारा जीता गया था|
🔹बाद में भरत ने पुरु के साथ नाता जोड़ लिया जिससे "कुरु" नाम का एक नया गोत्र बना|
वैदिक युग में कुरु व पांचालों ने गंगा के ऊपरी पठारों की राजनीत में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की जहाँ उन्होंने एक साथ राज किया




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